कोविड की 2 लहर और अंधविश्वास

अंधविश्वास

देश। कोविड महामारी की 2 लहर के दौरान लोगों के लिए अस्पतालों में ऑक्सीजन, दवाइयां, वेंटिलेटर, बेड, व स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ आदि की कमी के चलते हजारों लोगों की मौतें प्रतिदिन हो रही हैं। केंद्र सरकार व ज्यादातर राज्य सरकारें लोगों की जान की रक्षा करने में पूर्ण रूप से विफल रही हैं।

लोगों को राहत पहुंचाने के लिए न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ा है और न्यायालय प्रतिदिन केंद्र व राज्य सरकारों को उनकी कर्तव्य हीनता के लिए कठोर टिप्पणियां कर रहे हैं। देश में ये हालात सरकारों की लापरवाही के कारण पैदा हुए हैं।

वैक्सीन की कमी के कारण टीकाकरण केंद्र बंद होते जा रहे हैं। मोदी सरकार चिकित्सा क्षेत्र के वैज्ञानिकों की सिफारिशों व जरूरतों को अनसुना कर रही है तथा सरकार गोदी मीडिया के सहयोग से अपनी छवि बचाने में लगी हुई है।

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वायरस पर खोज करने वाले वैज्ञानिकों के ग्रुप के अध्यक्ष डॉक्टर शाहिद जमील ने इस्तीफा दे दिया है। डॉ जमील ने इस्तीफा देने से पहले दिनांक 13. 5. 2021 को न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार मैं एक लेख लिखते हुए कहा कि केंद्र सरकार से बार-बार कहने के बावजूद हमें वायरस के अध्ययन के लिए डाटा उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं।

पहले भी लगातार यह खबरें आती रही हैं कि केंद्र सरकार चिकित्सा- शास्त्र के वैज्ञानिकों की सिफारिशों पर कार्यवाही नहीं करती है और सारा सरकारी तंत्र करोना महामारी की पहली लहर की जीत पर अपनी पीठ थपथपाता रहा।

कोविड में अंधविश्वास को फैलाने में सरकार की मदद

केंद्र सरकार महामारी को नियंत्रित करने में अपनी असफलता को छुपाने के लिए व लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग अंधविश्वास फैलाने में लगे हुए हैं। भोपाल से भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर करोना के बचाव के लिए गोमूत्र पीने की सलाह दे रही है।

प्रदेश में भाजपा के मंत्री इन अंधविश्वासों को आगे बढ़ा रहे हैं।अहमदाबाद में इनकी एक यूनिवर्सिटी में गाय के गोबर से शरीर पर लेप करके कोरोना को भगाया जा रहा है।

गोबर से लेप किए हुए व्यक्तियों की तस्वीरें देश व दुनिया के मीडिया में प्रसारित हो रही हैं। मेरठ में भाजपा का एक नेता ठेले पर हवन- कुंड रखकर हवन के धुएँ से गो-कोरोना गो-कोरोना के नारे लगवा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग हनुमान चालीसा के मंत्रों से महामारी को भगाने का अभियान गांव-गांव में चला रहे हैं।

ये लोग सारे देश में करोना महामारी को वैज्ञानिक आधार पर विशेषज्ञों की राय अनुसार नियंत्रण में करने की बजाय, गाय के गोबर -मूत्र, हवन- यज्ञ, तंत्र- मंत्र आदि गैर वैज्ञानिक अंधविश्वासों को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं।

इस अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले ये सभी लोग एक ही पार्टी भाजपा- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए हैं। भारत के संविधान की धारा 51A(h) हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए कहती है लेकिन मोदी जी की सरकार ने संविधान के मूल तत्व जैसे संघीय व्यवस्था, धर्मनिरपेक्षता, स्वतंत्र न्यायपालिका का जिस प्रकार लगातार उल्लंघन किया है।

उसी तरह से विवेक व वैज्ञानिकता मैं इस सरकार का रत्ती भर भी विश्वास नहीं है।डॉक्टरों का कहना है कि गाय के गोबर व गोमूत्र से इलाज् की बजाये, नई बीमारी हो सकती है।

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गोबर- पैथी के खिलाफ लिखने पर भाजपा की मणिपुर राज्य की सरकार ने एक पत्रकार किशोरचंद्र व एक सोशल एक्टिविस्ट श्री अरेनडरो पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून( N.S.A ) के मुकदमा में गिरफ्तार कर लिया हैं। बाबा रामदेव की कोरोनिल दवाई का मुहूर्त केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन व नितिन गडकरी ने पिछले दिनों किया था।

कोविड और अंधविश्वास का मेल रामदेव की दवाई

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वह दवाई कोविड महामारी की दूसरी लहर मैं लोगों के कोई काम नहीं आई, लेकिन इन मंत्रियों व बाबा रामदेव की जवाबदेही कौन तय करे कि इन्होने देश की जनता से धोखा क्यों किया। केंद्र सरकार व उसके मंत्रियों व भाजपा नेताओं के इन कृत्यों से दुनिया में हमारे देश की हंसी उड़ाई जा रही है।

मोदी जी के गुजरात राज्य में कोविड महामारी ने जो तांडव मचाया है और गुजरात मॉडल मैं स्वास्थ्य ढांचे की जो पोल खोली है वह देखने लायक है।

दैनिक भास्कर अखबार की एक खबर के अनुसार गुजरात राज्य के 33 जिलों व 08 निगमों द्वारा दिनांक 1 मार्च से 10 मई 2021 तक सिर्फ 71 दिनों में 123871 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं जबकि सरकारी आंकड़ों में इनही 71 दिनों में कोरोना से 4218 मृत्यु होना बताया गया है।

इससे यह पता चलता है कि भाजपा किस प्रकार झूठ का फर्जी मॉडल खड़ा कर सकती है। एक गुजराती कवियत्री पारुल खंखर ने दिनांक 11:05 2021 को अपने फेसबुक पेज पर ‘शव वाहिनी गंगा’ शीर्षक से जो एक कविता लिखी है वह इस देश की पीड़ित जनता की व्यथा को सही प्रकट करती है।

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भाजपा की दूसरी राज्य सरकार उत्तर प्रदेश जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बार-बार कह रहे हैं कि प्रदेश में दवाइयां, बैड, ऑक्सीजन व वेंटिलेटर की कोई कमी नहीं है लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बार- बार योगी सरकार की इस झूठ का पर्दाफाश किया है जो वह भगवाँ- वस्त्र धारण करके बोल रहे थे।

उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने हरिद्वार में कुंभ मेले की इजाजत देकर व योगीजी की उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव करवाकर उत्तर प्रदेश के गांव-गांव में महामारी को फैला दिया और अब महामारी के आंकड़ों को छुपाने में लगे हुए हैं।

सरकार कहती है कि पंचायत चुनाव में करोना महामारी से सिर्फ 3 अध्यापकों की मृत्यु हुई है जबकि उत्तर प्रदेश अध्यापक संघ ने 1821 मृतक अध्यापकों की विसतृत सूची जारी की है जो चुनाव ड्यूटी के दौरान करोना पीड़ित होकर स्वर्ग सिधार गए। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा शासित राज्यों की सरकारें कोविड महामारी का मुकाबला कैसे कर रही हैं।