पर्यावरण: मार्च महीना रहा इतिहास का 8वां सबसे गर्म दिन

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पर्यावरण। पिछले 142 वर्षों के रिकॉर्ड में मार्च 2021, 8वां सबसे गर्म मार्च था| यही नहीं अब तक के तापमान सम्बन्धी आंकड़ों से पता चला है कि यह वर्ष 9वां सबसे गर्म साल हो सकता है| यह जानकारी एनओएए के नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल इंफॉर्मेशन द्वारा जारी रिपोर्ट में सामने आई है| यदि मार्च के वैश्विक औसत तापमान की बात करें, तो इस वर्ष मार्च का तापमान बीसवीं सदी के औसत से 0.85 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है|

गौरतलब है कि इस सदी का वैश्विक औसत तापमान 12.7 डिग्री सेल्सियस है| यदि मार्च महीने के तापमान को देखें तो यह 45वां मौका है जब मार्च 2021 में तापमान  20वीं सदी के औसत से ज्यादा है| इसी तरह यह लगातार 435वां  महीना है जब तापमान सदी के औसत तापमान से ज्यादा है|

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वहीं यदि जनवरी से मार्च के तापमान की बात करें तो जमीन और समुद्र की सतह का औसत तापमान 20वीं सदी के औसत से 0.76 डिग्री ज्यादा है| इस तरह यह 9वां मौका है जब तापमान इतना ऊपर गया है| इस वर्ष अब तक तापमान 2007 के साथ सम्मिलित रूप से 9वें स्थान पर है| वहीं यदि क्षेत्रीय रूप से देखें तो एशिया में अब तक के तापमान (जनवरी से मार्च) के आधार पर वो चौथा सबसे गर्म वर्ष है इसी तरह कैरिबियन के लिए यह अब तक का आठवां सबसे गर्म वर्ष है|

दुनिया के कुछ देशों और हिस्सों के लिए यह महीना कुछ ज्यादा ही गर्म था| दक्षिणी और पूर्वी कनाडा, अमेरिका के पूर्वी हिस्सों, मध्य पूर्व, दक्षिण और पूर्वी एशिया के साथ मध्य अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में तापमान औसत से 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है|

एक बार फिर इस वर्ष मार्च में समुद्री बर्फ की मात्रा में रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई है| जब उसकी मात्रा 1981 से 2010 के औसत की तुलना में 5.1 फीसदी कम रिकॉर्ड की गई है| वो 43 वर्षों के रिकॉर्ड में मार्च के दौरान 9वीं बार सबसे कम रिकॉर्ड की गई है| यही नहीं प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, आर्कटिक में समुद्री बर्फ 21 मार्च को 92 लाख वर्ग किलोमीटर के साथ वर्ष के अपने अधिकतम स्तर पर पहुंच गई थी| जो 2007 के साथ सम्मिलित रूप से सातवीं बार सबसे कम है|

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इसी तरह यदि उत्तरी गोलार्ध को देखें तो पिछले महीने बर्फ मार्च महीने में रिकॉर्ड 12वीं बार सबसे कम थी| उत्तरी अमेरिका में यह नौवां मौका है जब मार्च में बर्फ इतनी कम जमी है| वहीं यूरेशिया में 14वां मौका है जब बर्फ में कमी दर्ज की गई है|

यह सब कुछ एक बात तो स्पष्ट करता है कि तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है जिसका चलते जलवायु में भी बदलाव आ रहा है| यदि हमने इन सब चेतावनियों पर आज गौर नहीं किया तो कल हमारे पास इससे निपटने का कोई मौका नहीं होगा