सरकार की खराब नीतियों के कारण देश के ऊपर बड़ा कर्ज

economic crisis 2 2

सार्वजनकि ऋण प्रबंधन पर जारी नवीनतम रिपोर्ट  में केंद्र सरकार की कुल देनदारियां जून 2020 के अंत तक बढ़कर 101.3 लाख करोड़ तक पहुंच जाने की जानकारी दी गई। 2019 के अंत में सरकार का कुल कर्ज 88.18 लाख करोड़ था। सार्वजनिक ऋण प्रबंधन की शुक्रवार को जारी त्रैमासिक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2020 के अंत में सरकार के कुल बकाए में सार्वजनिक ऋण का हिस्सा 91.1 प्रतिशत था। 

रिपोर्ट में यह कहा गया कि बकाया दिनांकित प्रतिभूतियों के लगभग 28.6 प्रतिशत की परिपक्वता की शेष अवधि पांच साल से कम समय रह गई है। आलोच्य अवधि तक इसमें वाणिज्यिक बैंकों की हिस्सेदारी 39 प्रतिशत और बीमा कंपनियों की हिस्सेदारी 26.2 प्रतिशत थी। 

READ ALSO : कोरोना से नहीं दिवालियपन और टेंशन से जिंदगी खो देंगे HOTEL व्यापारी: होटल एसोसिएशन

सार्वजनिक ऋण प्रबंधन प्रकोष्ठ (पीडीएमसी) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में नए इश्यू की औसत भारित परिपक्वता 16.87 वर्ष थी, जो अब कम होकर 14.61 वर्ष पर आ गई। वहीं केन्द्र सरकार ने अप्रैल- जून 2020 के दौरान नकद प्रबंधन बिल जारी कर 80,000 करोड़ रुपए जुटाए।

अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष के डेटाबेस के अनुसार वर्तमान में यह सकल घरेलू उत्पादन का 43 प्रतिशत है। भारत वर्तमान में कर्ज के बोझ के मामले में 170 देशों में 94वें स्थान पर है। लेकिन इस वर्ष अधिक कर्ज लेने के कारण इस नंबर में उछाल आ सकता है। 

READ ALSO : जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह पर लगे गंभीर आरोप, जनता के पैसों से खरीदी गाड़ी

भारत में बढ़ते कर्ज को लेकर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर इला पटनायक ने बिजनेस स्टैंटड को बताया कि कोरोना संकट के कारण इस समय देश के साथ देश की जीडीपी के हालात बुरे हुए है।

समय की मांग है कि हम सरकार को किसी समझौते के अंतर्गत चलना चाहिए। कोरोना के कारण क्योंकि लोगों के काम धंधे बंद रहे थे जिस कारण सरकार को राजस्व कम मिलेगा। दूसरी और बाजार को पैसा देना भी जरूरी है। अभी भले ही हमारे ऊपर कर्ज बढ़ेगा लेकिन जैसे ही विकास की रफ्तार बढ़ेगी तो कर्ज में पहले जैसी स्थिरता आना शुरू हो जाएगी